NASA और बोइंग बना रहे हैं अगली पीढ़ी का विमान, ईंधन की खपत होगी बेहद कम

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और विमान निर्माता कंपनी बोइंग मिलकर एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं 

जिससे भविष्य की उड़ानें पर्यावरण के अनुकूल हो सकेंगी.

स्पेस एजेंसी को उम्मीद है कि 2030 तक यह तकनीक आम उपयोग में आ सकेगी.

इस प्रायोगिक विमान की पहली परीक्षण उड़ान 2028 में होने वाली है.

इस नए विमान के माध्यम से लगभग 50% वाणिज्यिक बाजार को शुरुआती दौर में फायदा पहुंच सकता है. 

बोइंग का अनुमान है कि 2035 और 2050 के बीच नए सिंगल-आइज़ल विमानों की मांग में 40,000 विमानों की वृद्धि होगी.

वह आज के सबसे कुशल विमानों की तुलना में ईंधन की खपत और उत्सर्जन को 30% तक कम कर सकता है.