Radha Krishna Story In Hindi | कृष्ण भगवान की सम्पूर्ण जीवन गाथा

भारतीय संस्कृति परंपरा एवं मान्यताएं सदा ही कौतूहल का विषय रही है । विशेषकर भगवान कृष्ण का जीवन चरित्र अनेक रहस्य से भरा पड़ा है । तो दोस्तों आइए Krishna Story In Hindi में भगवान कृष्ण की संपूर्ण जीवन गाथा को समझने का प्रयास करें ।

Table of Contents

श्री कृष्‍ण की बचपन की कहानी Childhood of Krishna Story in Hindi

Krishna Story In Hindi | श्री कृष्‍ण की बचपन की कहानी

श्री कृष्‍ण की बचपन की कहानी में सबसे अद्भुत, चमत्कारिक एवं रोमांचित करने वाली गाथा बाल्‍यकाल की रही है । जन्‍म से लेकर किशोरा अवस्‍था कृष्‍ण का चरित्र अत्‍यंत विस्‍मयकारी रही है । आइये Krishna Story in Hindi इसे एक एक करके समझने का प्रयास करते हैं –

भगवान कृष्‍ण का जन्म – Birth of Lord Krishna Story in Hindi

भगवान कृष्‍ण का जन्‍म एक असमान्‍य घटना थी । यह लौकिक न होकर अलौकिक था । इनके जन्‍म के समय अनेक चमत्‍कारिक घटनायें हुई थी । दोस्‍तों इसे क्रमश: देखते हैं- Krishna Story in Hindi

भगवान कृष्ण का जन्म कब हुआ था?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म 28वें द्वापर युग के 7वें मन्वन्तर (विवस्वान मनवंतर) के श्वेता वराह कल्प या सारस्वत कल्प के अंत में हुआ था। इस अवधि को आज के परिप्रेक्ष्‍य में देखे तो लगभग 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्‍ण का जन्‍म हुआ था ।

भगवान कृष्‍ण की जन्‍म की कहानी – Krishna Story In Hindi

आज से लगभग 5000 वर्ष पहले की बात है भारत के वर्तमान मथुरा में ही जब यहां राजतंत्र हुआ करता था तब राजा उग्रसेन का राज्य था, राजा उग्रसेन के मंत्री के रूप में वासुदेव नामक यदुवंशी मंत्री के रूप में कार्य करता था। 

उग्रसेन का कंस नाम का एक बहुत बलशाली किंतु दुराचारी पुत्र था ।  वह अपने पिता को ही सत्ता से पदच्युत कर स्वयं मथुरा के राजा बन बैठे थे। उसने अपनी छोटी बहन देवकी का विवाह वासुदेव से करने के पश्चात उनकी विदाई करने स्वयं जा रहे थे कि अकस्मात एक आकाशवाणी हुई की देवकी का आठवां पुत्र है तुम्हारा काल होगा। 

इससे कंस उद्वेलित होकर देवकी को मारना चाहा किंतु वासुदेव की समझाइश पर उन्होंने उन दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। कंस एक-एक करके देवकी-वासुदेव की पुत्रों को जन्म लेते ही मारने लगा । 

आठवीं संतान के जन्म के समय इसे दैवीय चमत्कार ही कहा जाये की उस कारागार में समय बेड़ियों में बंधे हुए वासुदेव का बेडि़यां स्वयं टूट कर बिखर गए, कारागार की सुरक्षा प्रहरियों को बेहोशी आ गई, कारागार की सभी ताले टूट गए, दरवाजे खुल गए ।

भगवान कृष्‍ण का जन्म

वासुदेव अपने नवजात शिशु को रातों-रात अपने मित्र नंद के यहां गोकुल में छोड़ आए । उनके वापस आते ही कारागार के सभी दरवाजे खुद ब खुद बंद हो गए और वासुदेव बेड़ियों से जकड़ गए ऐसा होते ही सभी प्रहरी जाग उठे । 

किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई कि नवजात शिशु कारागार से बाहर निकाल लिये गए हैं ।  इधर वासुदेव नंद की नवजात शिशु जो एक कन्या थी को साथ ले आए थे वह रोने लगी और सबको यह विश्वास हो गया कि देवकी के गर्भ से आठवीं संतान के रूप में कन्या संतान का जन्म हुआ है । 

इस प्रकार भगवान कृष्‍ण के दो-दो माता हुए एक पालन कर्ता नंद बाबा-याशोदा रानी और दूसरा जन्‍मदात वासुदेव-देवकी । कृष्ण का जन्म एक अलौकिक जन्म है, उनका जन्म ही उन्‍हें ईश्वर सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं । 

भगवान कृष्‍ण का जन्‍मोत्‍सव – Krishna Story in Hindi

वासुदेव द्वारा गोकुल नंद के घर से नवजात बालक उनकी नवजात बालिका से अदला-बदली घटना को कोई नहीं जान पाए थे, सबको ऐसा लगा मानों नंद को बालक ही हुआ है । सभी नंद के बालक होने का जन्‍मोत्‍सव मनाने लगे । 

भगवान कृष्‍ण द्वारा पूतना वध

उधर कंस उस नवजात कन्‍या की हत्‍या तो कर देते हैं किन्‍तु उनको यह विश्‍वास नहीं हो रहा था कि देवकी गर्भ से कन्‍या हुई है । इस आशंका के आधार पर वह मथुरा और गोकुल के सभी नवजात शिुशुओं को मारने का आदेश दिया । गोकुल के सारे नवजात शिशु मारे गए किन्‍तु नंद का वह छोरा बच रहा गया । 

इस बात की जानकारी होने पर कंस ने पुतना नामक एक राक्षसी को गोकुल भेजा, पुतना छल बल से कृष्‍ण तक पहॅुच गई वह अपने स्‍तन पर विष लेप कर शिशु कृष्‍ण को दूग्‍ध पान कराने लगी किन्‍तु ऐसा चमत्‍कार हुआ कि वह शिशु जैसे-जैसे दुग्‍ध पान करने लगा वह पुतना छटपटाने लागी और अंत में मर गई । 

बाल्‍यकाल में ही कई राक्षसों को मारे

Krishna Story in Hindi – पूतना वध की घटना कंस को यह विश्‍वास दिलाने के लिए पर्याप्‍त था कि यही शिशु उनका काल है । अब तो वह उसे मरवाने के और अनेक प्रयास करने लगे । तृणावर्त, वृत्‍तासुर, बकासुर, धेनुकासुर, प्रलम्‍बासुर जैसे अनेक असुरों को उस बालक को मारने के लिए भेजा ।

ऐ सभी मायावयी थे और अपने माया के विस्‍तार से उस बालक को मारने के अनेक प्रयास किए किन्‍तु ये सभी अपने प्रयास में स्‍वयं मारे गए । इस प्रकार एक अबोध शिशु बड़े-बड़े असरों को मौत के घाट उतार दिए । यह सभी घटनाएं ईश्‍वरीय चमत्‍कार ही थे ।

श्री कृष्‍ण की माखन चोरी लीला – Krishna Story in Hindi

भगवान कृष्‍ण की बाललीला में माखन चोरी लीला अधिक विख्‍यात है । यद्यपि नंद बाबा के घर दूध, दही, माखन की कोई कमी नहीं फिर भी भगवान कृष्‍ण चपलता दिखाते हुए ग्‍वालिनों के मटके तोड देते और उनके घर चोरी-छुपे घूस कर घर में रखे माखन को अपने बाल मित्रों के साथ चट कर जाते ।

भगवान कृष्‍ण अकल्‍पनिय कार्य

भगवान कृष्‍ण अपने बाल्‍यकाल में अनेक अकल्‍पनिय कार्य किए । पुतिना से लेकर अघासुर के दैत्यों को मारना, कालिया को यमुना से बाहर निकालना, गोवर्धन पहाड़ को अपने कनिष्‍ठा उंगली से उठा कर पूरे गोकुलवासियों का मूसलाधार बारिश से रक्षा करना आदि कई कार्य उन्‍होंने किए ।

राधा-कृष्ण की अमर प्रेम गाथा – Radha Krishna Story In Hindi

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कृष्‍ण और राधा दोनों बालमित्र थे । इनकी मैत्रीय इतनी प्रगाढ़ थी कि दोनों एक दूसरे के पूरक थे । कृष्‍ण बासुरी बजाते और राधा बासुरी के धुन में खो जाती । इन दोनों के बीच का प्रेम वासनारहित आत्‍मीय था । राधा-कृष्‍ण का महारास एक अलौकिक घटना है । 

महारास में राधा सहित सभी ब्रज नारियां कृष्‍ण के साथ रास-विलास किए थे । यह महारास प्रेम की पराकाष्‍ठा थी जिसमें जितनी संख्‍या में गोपियां थी उतने ही संख्‍या में कृष्‍ण देह धारण कर प्रत्‍येक के साथ युगल नृत्‍य-विलास किए । 

प्रेम की कसौटी वियोग में होती है । जब कृष्‍ण कंस के बुलावे पर वृन्‍दावन छोड़ मथुरा गए तो राधा और कृष्‍ण में ऐसा वियोग हुआ कि फिर दोनों में संयोग होने की कोई कथा नहीं आई । 

इस वियोग के समय कृष्‍ण  ने उद्धव को राधा को समझाने भेजा । उद्धव  ने जब राधा को समझाने का प्रयास किया तो उन्‍होंने पाया कि राधा और कृष्‍ण का प्रेम अटूट है राधा को सिखाने गए उद्धव उल्‍टे राधा से प्रेम का पाठ सीख कर आये । 

कृष्‍ण भगवान की कथा – krishana Story In Hindi

कृष्‍ण भगवान की कथा

कहा जाता है भगवान कृष्‍ण का जन्‍म आसुरी शक्ति को नष्‍ट करने एवं अपने भक्‍तों को सतसंगत देने के लिए हुआ था । यह कथन सत्‍य भी लगता है जब हम कृष्ण के संपूर्ण जीवन का दर्शन करते हैं । 

शैशव काल से बाल्‍य काल तक जहां एक ओर  गोकुल में उन्होंने कंस द्वारा भेजे गए असुरों का नाश किया तो वहीं दूसरी ओर बाल ग्‍वाल, ग्‍वालिनों को अपने प्रेम से आत्‍म विभोर किया । 

किशोरावस्था में मथुरा में आकर चाणूर, मुष्टिक जैसे कई असुरों को मारने के बाद असुर राज कंस का वध किया ।  तो इस समय अक्रर, उद्धव जैसे भक्‍तों को अपनी संगती दी ।

कंस की हत्‍या का बदला लेने कंस के ससुर जरासंध ने कई बार मथुरा में आक्रमण किया और कृष्‍ण बार-बार जरासंध को युद्ध में हराया हर बार के युद्ध में वे जरासंध के साथ आये असुरों का नाश किया और मथुर वासियों को बार-बार के युद्ध से बचाने के लिए मथुरा छोड़ कर द्वारिका में जा बसे ।

भगवान कृष्‍ण एवं सुदामा की मित्रता | Friendship of Sudama Krishna Story in Hindi

भगवान की शिक्षा-दीक्षा उज्‍जैन के संदीपनी गुरूकुल में हुआ । अल्‍प समय में ही कृष्‍ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ संपूर्ण शिक्षा प्राप्‍त की । इसी गुरूकुल में कृष्‍ण का परिचय सुदामा नामक ब्राह्मण बालक से हुआ । उस बालक को वह अपना मित्र बना लिया । 

Krishna Story in Hindi – कृष्‍ण-सुदामा की यह मित्रता, मित्रता के लिए एक उदाहरण बन गया जब बाद में सुदामा द्वारा द्वारिकापुरी में कृष्‍ण से भेट करने गए । इस भेट में कृष्‍ण का आतिथ्‍य और मित्रता दोनों का दर्शन होता है । 

भगवान कृष्‍ण के विवाह (Krishna Story in Hindi)

रूखमत देश की राजकुमारी रुखमणी जो मन ही मन श्रीकृष्‍ण से प्रेम करती थी । वह दूसरे के साथ विवाह तय होने पर श्री कृष्‍ण को प्रणय निवेदन भेजी । तब भगवान कृष्‍ण उनकी अभिलाषा पूर्ण करने रुक्षमणी का हरण कर ले आए । इस प्रकार उनका प्रथम विवाह हुआ । 

बाद में उन्‍हें उनके पराक्रम से प्रभावित होकर सात और कन्‍याएं सत्‍यभामा, कालिन्‍द्री, विन्‍दा, सत्‍या, भद्रा, सुलक्षण और जामवंती ने अपना वर चुना । इस प्रकार भगवान कृष्‍ण का 8 विवाह हुआ । 

कुछ समय पश्‍चात उनका भौमासुर से युद्ध में भौमासुर मारा गया उनके बंदीगृह 16100 राजकुमारियां बंदी थी, उन्‍हें कृष्‍ण ने मुक्‍त कराया किन्‍तु सभी राजकुमारियां एक स्‍वर उन्‍हें स्‍वीकार करने का निवेदन करने लगी इस पर भगवान कृष्‍ण उन सभी राजकुमारियों से विवाह किया इसप्रकार भगवान की कुल 16108 रानियां हुई ।

महाभारत युद्ध और गीता का ज्ञान

Krishna Story in Hindi -महाभारत युद्ध में पूरे भारत देश के राजा भाग लिए कोई कौरव पक्ष से तो कोई पांडवों के पक्ष से । कृष्‍ण इस युद्ध दोनों ही ओर भाग लिया । कौरव पक्ष को अपनी सेना और आयुध दे दिये तो स्‍वयं निहत्‍थे अकेले पांडवों को साथ दिया । 

युद्ध के आरंभ में ही जब अर्जुन अपने विरोध में अपने पारिवारिक संबंधियों, मित्रों को देखा तो युद्ध करने से इंकार कर दिया तब भगवान कृष्‍ण ने कर्म करने को धर्म से श्रेष्‍ठ बतलाते हुए जीवन को नश्‍वर किन्‍तु आत्‍मा को शाश्‍वत निरुपित करते हुए जो कथन कहे वहीं आज श्रीमद्भागवत के रूप में जाना जाता है । 

महाभारत के इस युद्ध में श्री कृष्‍ण ने जो अधर्म, अन्‍याय के साथ खड़े थे उन सबको एक-एक करके पांड़वों द्वारा पराभूत कराया और धर्म में अडिग लोगों की प्रत्‍येक स्थिति में रक्षा की । इस प्रकार भगवान कृष्‍ण अपने उद्घोष -‘धर्म संस्‍थापनार्थे’ को सिद्ध किया ।

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श्रीकृष्‍ण के संपूर्ण जीवन का संदेश – Krishna Story In Hindi

Krishna Story In Hindi में भगवान श्री कृष्‍ण के संपूर्ण जीवन को देखे तो हम पाते हैं कि वो आजीवन अधर्मीयों, दुराचारियों से लड़ते रहे और धर्म की स्‍थापना के लिए आजीवन प्रयास करते रहे । 

यहां एक बात ध्‍यान रखने योग्‍य धर्म का अर्थ किसी पूजा पद्यति से न होकर कर्म करने की कसौटी अर्थात किस समय, किस परिस्थिति में क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं करना चाहिए का निर्धारण करना है । 

ऐसे कर्म का निर्धारण करना है जिससे प्राणी मात्र का हित हो । श्री कृष्‍ण का जीवन योग, ज्ञान से पड़ा है जिसको समझने के लिए आत्‍मीय भाव से कृष्‍ण जीवन का दर्शन करना होगा ।

Radha Krishna Story In Hindi: FAQs

भगवान श्रीकृष्ण की कितनी पत्नी थी?

पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की 16 हजार 107 पत्नियाँ थी परन्तु उन्होने सिर्फ रूक्मिणी से विवाह रचाया था।

क्या श्रीराम और श्रीकृष्ण एक ही हैं?

श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही भगवान है, पर दोनों ने अलग- अलग समय शरीर रूप में जन्म लिया। ज्ञान की द्दष्टि से देखा जाए तो दोनों एक ही है, परन्तु इन्होने अलग अलग समय में भौतिक जीवन जिया।

भगवान श्रीकृष्ण किसकी पूजा करते थे?

भगवान श्रीकृष्ण भगवान शिव की पूजा में लीन रहते थे।

भगवान श्रीकृष्ण को ठाकुर क्यों कहा जाता है?

ठाकुर शब्द देवता का पर्याय है इसे किसी भी ब्राम्हण या देवता के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक विशेषण भी है जिसका अर्थ है भगवान सर्वोपरि है।

भगवान श्रीकृष्ण ने राधा से शादी क्यों नहीं की थी?

प्रेम और विवाह दो अलग- अलग चीजें हैं, ऐसा साबित करने के लिए ही भगवान श्रीकृष्ण ने राधा से शादी नहीं की थी।

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